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बढ़ती आबादी पर CM योगी के बयान के बाद वार-पलटवार, कहां फंसा है जनसंख्या नियंत्रण बिल?

जनसंख्या दिवस पर सोमवार को सीएम योगी के बयान कि ऐसा न हो कि किसी वर्ग की आबादी बढ़ने की स्पीड और उनका प्रतिशत ज्यादा हो के बाद से यूपी में इस मामले की लेकर सियासी चर्चा शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर सीएम योगी पर तंज कसा और कहा,बढ़तीआबादीपरCMयोगीकेबयानकेबादवारपलटवारकहांफंसाहैजनसंख्यानियंत्रणबिल अराजकता आबादी से नहीं, लोकतांत्रिक मूल्यों की बर्बादी से उपजती है.सपा के गठबंधन साथी और जनवादी पार्टी के अध्यक्ष संजय चौहान ने बताया की बीजेपी केवल धर्म की राजनीति करना जानती है और अपना वोट बैंक साधने के चलते सीएम इस तरह के बयान दे रहे हैं, यह लोग हमेशा से धर्म विशेष को टारगेट करते आए हैं.वहीं, जनसंख्या नियंत्रण पर सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि औलाद पैदा करने का ताल्लुक निजी तौर पर इंसान से नहीं अल्लाह से है. अल्लाह जो बच्चा पैदा करता है उसका इंतज़ाम करता है. लेकिन फिर भी अगर सरकार अगर नियंत्रण चाहती है तो क़ानून लाने की जगह वो तालीम पर दे.यूपी सरकार में मंत्री रहे और बीजेपी नेता मोहसिन रजा ने कहा सीएम योगी ने जो बात कही है उस पर सबको आगे आना चाहिए, बढ़ती जनसंख्या यूपी के लिए चिंता का विषय है. किसी धर्म के चश्मे से न देखते हुए आगे आना चाहिए, मुख्य धारा से जुड़ना चाहिए. विपक्ष तुष्टिकरण की राजनीति करता है ऐसे समय में भी, हमारी सरकार सबके लिए है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ऐसे मामलो में बाहर नजर आता है. ओवैसी साहब इस तरह की बात कर रहे हैं, वह बस्तियों में जाकर देखें, ऐसे जनसंख्या नियंत्रण होगा. आप एक वर्ग को वोट बैंक बनाकर रखना चाहते हैं और हम उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा ऐसे बच्चे गुमराह भी होते हैं, पत्थर भी चलाता है. वो ओवैसी की तरह नहीं हैं जिनके बच्चे लंदन में पढ़ रहे हैं.हालांकि, पिछले साल उत्तर प्रदेश लॉ कमीशन ने जनसंख्या नियंत्रण बिल का फाइनल ड्राफ्ट सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंप दिया था. इसमें आम लोगों की भी राय ली गई थी. जस्टिस एन मित्तल ने बताया कि अगस्त 2021 को यह ड्राफ्ट सरकार को दे दिया गया था और अब इसको आगे बढ़ाने का कार्य सरकार के हाथ में है. जनसंख्या नियंत्रण बिल का फाइनल ड्राफ्ट सरकार को अगस्त में सौंपे जाने के बाद सरकार ने इसे न्याय विभाग को भेजा, न्याय विभाग द्वारा इसका परीक्षण किया जा रहा है, अगर कुछ बदलाव होंगे तो वो भी किए जा सकते हैं, इसके बाद इस को आगे बढ़ाया जाएगा.रिटायर्ड जस्टिस एएन मित्तल ने बताया कि कानून कैसा होना चाहिए, इसको लेकर 8,500 से ज्यादा सुझाव आए थे, जिसमें से 8,200 सुझावों को बिल में शामिल किया गया आयोग ने पिछले महीने वेबसाइट पर ड्राफ्ट बिल को अपलोड किया था और इस पर लोगों से सुझाव मांगे थे.उन्होंने बताया कि जिन लोगों का एक ही बच्चा हो, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए... लेकिन जिनके दो से ज्यादा से बच्चे होंगे उन्हें कई सुविधाओं से वंचितकर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि अगर किसी को जुड़वा बच्चा होता है, दिव्यांग होता है या ट्रांसजेंडर होता है तो उसे टू-चाइल्ड नॉर्म्स का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. इसका मतलब ये कि अगर किसी माता-पिता का बच्चा दिव्यांग होता है, ट्रांसजेंडर होता है या फिर जुड़वा होते हैं तो उन्हें तीसरा बच्चा करने की इजाजत होगी.उन्होंने बताया कि जिनके दो बच्चे होंगे, उन्हें ग्रीन कार्ड दिया जाएगा और जिनका एक बच्चा होगा, उन्हें गोल्ड कार्ड दिया जाएगा. कार्ड के आधार पर ही उन्हे सरकार की ओर से अतिरिक्त सुविधाएं दी जाएंगी. उन्होंने ये भी बताया कि गरीबी रेखा से नीचे आने वाले जिन परिवारों में एक ही बच्चा होता है और अगर वो अपनी मर्जी से नसबंदी करवाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त सुविधाएं दी जाएंगी.हालांकि, एक सुझाव ये भी आया था कि जिनके दो से ज्यादा बच्चे हों, उनसे वोटिंग का अधिकार छीन लिया जाए. इसे आयोग ने खारिज कर दिया है. इस बारे में जस्टिस मित्तल ने बताया, वोटिंग का अधिकार संवैधानिक और मौलिक अधिकार है. इसलिए राज्य सरकार के पास ऐसा कोई कानून बनाने का अधिकार नहीं है.

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