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Parenting Shaming: आपको भी बच्चों की परवरिश पर सुनने पड़ते हैं ताने? करें ये काम

बच्चों के प्रति पेरेंट्स की कई जिम्मेदारियां होती हैं. ऐसे में छोटी-छोटी गलतियों के लिए उन्हें दोषी ठहराना बिल्कुल भी सही नहीं है. हालांकि,आपकोभीबच्चोंकीपरवरिशपरसुननेपड़तेहैंतानेकरेंयेकाम पहले जिस तरह से बच्चों की परवरिश की जाती थी, उसके मुकाबले में आज की जेनरेशन वैसा नहीं कर पाती जिसके चलते उन्हें बड़े-बुजुर्गों की और से कई तरह की बातें सुननी पड़ती हैं. कई बार पेरेंट्स को बहुत ज्यादा सख्ती, नरमी दिखाने के लिए भी काफी सुनना पड़ता है.इसे ही मनोवैज्ञानिक और पेरेंटिंग एक्सपर्ट पेरेंट शेमिंग के नाम से डिफाइन करते हैं. पेरेंट शेमिंग तब होती है जब माता-पिता की उन चीजों को लेकर आलोचना की जाती है जिनसे वास्तव में बच्चे की परवरिश में कोई नुकसान नहीं पहुंचता. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस चीज का कोई अंत नहीं है.सिर्फ आम लोग ही नहीं सेलेब्रिटीज को भी इसका सामना करना पड़ता है. कई सेलेब्स ने इस बारे में खुलकर बात भी की है.साल 2017 में एक मशहूर फुटबॉलर डेविड बेकहम मे सोशल मीडिया पर अपनी 5 साल की बेटी को लिप्स पर किस करते हुए एक फोटो शेयर की थी जिसमें बहुत से लोगों ने कमेंट किया था और इसे अनुचित बताया था.शेमिंग कीफीलिंग गिल्ट (Guilt) से अलग होती है. गिल्ट या पछतावाएक व्यक्ति को अपने काम को सुधारने या ठीक करने का चांस देती है. वहीं दूसरी तरफ शेमिंग के चलते व्यक्ति को खुद को लेकर बुरा, अयोग्य और अपर्याप्त होने का एहसास होने लगता है.इस बारे में दोराय नहीं है कि कोई भी पेरेंट्स परफेक्ट नहीं होते. कई बार माता-पिता से कुछ ऐसी गलतियां हो जाती हैं जिससे सामने वाला व्यक्ति उन्हें जज या उनकी आलोचना करने लगता है. कई बार सामने वाला व्यक्ति कुछ ऐसी बातें बोल देता है जिससे पेरेंट्स को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है.आमतौर पर बच्चे की परवरिश को लेकर माता-पिता को जो बातें सुनाई जाती हैं उसे पेरेंटिंग शेमिंग कहा जाता है. यह तब होता है जब दूसरों को लगता है कि वह बच्चों की परवरिश बेहतर ढंग से करना जानते हैं. कई बार इस तरह की बातें सुनाकर बुरा महसूस कराना ही सामने वाले व्यक्ति का एकमात्र लक्ष्य होता है.ऐसे में मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पेरेंटिंग शेमिंग से पीड़ित लोग काफी ज्यादा परेशान और अयोग्य महसूस करने लगते हैं. उन्हें अपनी योग्यताओं पर संदेह महसूस होने लगता है. जिससे कहीं ना कहीं बच्चे की मानसिक सेहत पर असर पड़ता है. इससे कई बार बच्चे अपने माता-पिता के डर को महसूस करने लगते हैं.द कन्वर्सेशन की ओर से प्रकाशित 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटेंसिव पेरेंटिंग, पेरेंटिंग शेमिंग का नया लक्ष्य बन गया है.इंटेंसिव पेरेंटिग, एक ऐसे तरह की पेरेंटिंग हैजिसमें बच्चों की परवरिश के लिए ज्यादा समय, एनर्जी और पैसे खर्च करने की जरूरत होती है. इस तरह की पेरेंटिंग में माता-पिता बच्चे की चीजों में कुछ ज्यादा ही दखलअंदाजी करना शुरू कर देते हैं ताकि उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत और परेशानी से बचाया जा सके.ओवरपेरेंटिंग जिसे हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है एक तरह की इंटेंसिव पेरेंटिंग होती है. इसमें लोग माता-पिता की यह कहकर आलोचना करते हैं कि उन्होंने अपने बच्चों को काफी ज्यादा बिगाड़ दिया जिसके चलते वह दुनिया की चुनौतियों को हैंडल नहीं कर सकते हैं.अगर पुराने समय की बात करें तो आपको एहसास होगा कि पेरेंटिंग शेमिंग नई नहीं है. पहले के समय में भी लोग पेरेंटिंग शेमिंग का शिकार होते थे. पहले के समय में पेरेंट्स को बच्चों कीदेखभाल सही से ना करने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ता था.पेरेंटिंग शेमिंग की इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी है कि लोग इस बात को समझें कि कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चे का बुरा नहीं चाहते. ऐसे में जरूरी है कि बच्चे की परवरिश करने के लिए लोग पेरेंट्स का हौंसला बढ़ाएं. साथ ही यह बात भी समझनी होगी कि कोई भी इंसान गलतियों से ही सीखता है.जब आप पहली बार पेरेंट्स बनते हैं तो आपसेकई तरह की गलतियां हो सकती हैं. इसके लिएअपनी गलतियों से सीखने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. अगर आपको कोई पेरेंट शेमिंग करता है तो इसे लेकर खुद को दोष ना दें.जो लोग पेरेंट्स की शेमिंग करते हैं, वो इसबात ख्याल रखें कि अगर कोई आपकी भी इस तरह से शेमिंग करे तो आपको कैसा महसूस होगा.

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